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वनों का ह्रास तथा संरक्षण

  वनों का ह्रास तथा संरक्षण :- इस पेज में हम आपको बताने वाले हैं कि वन विनाश के प्रमुख कारकों को लिखें। वन ह्रास के परिणाम को लिखें। वन के संरक्षण हेतु कुछ उपाय । वन तथा वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों की चर्चा करें । वन और वन्य जीवों का संरक्षण आवश्यक है। क्यों? चिपको आंदोलन के बारे में बताइए। जैवविविधता क्या है ?


    वन विनाश के प्रमुख कारक
    वनों का ह्रास तथा संरक्षण
    वनों का ह्रास तथा संरक्षण

    वन विनाश के प्रमुख कारकों को लिखें।

    वन क्षेत्र में लगातार कमी आना वन विनाश कहलाता है । इसका मुख्य कारण मानवीय हस्तक्षेप है। वन विनाश के प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं :- 

    वन विनाश के प्रमुख कारक
    1.कृषि भूमि का फैलाव
    2.सड़क , रेलमार्ग इत्यादि का विकास
    3.पशुचारण
    4.औद्योगिकरण एवं नगरीकरण
    5.ईंधन के लिए लकड़ियों का उपयोग
    6.जनसंख्या वृद्धि
    7.तेजी से खनन कार्य का विकास
    8.मानवीय हस्तक्षेप
    9.पालतू पशुओं के द्वारा अनियंत्रित चारन
    10.नदी घाटी परियोजना का विकास
    11.लकड़ियों का इंधन के रूप में उपयोग
    12.झूम खेती का प्रचलन

    वन ह्रास के परिणाम

    वन ह्रास के परिणाम को लिखें।

    वन ह्रास के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं :- 

    NO.वन ह्रास के परिणाम
    1.कई जीव जंतुओं की प्रजातियों का ह्रास।
    2.वन उत्पादों की कमी।
    3.चारा एवं लकड़ी की कमी।
    4.पारिस्थितिकी का संकट।
    5.कई वनस्पतियों का विलुप्ती करण।
    6.सूखा में बढ़ोतरी
    7.कई जड़ी बूटियों का खात्मा।
    8.कई जीव जंतुओं के आवासों में कमी।

    वन के संरक्षण हेतु कुछ उपाय 

    वनों के संरक्षण के लिए कुछ प्रमुख उपायों को लिखें।

    वनों को कटने या उसके विस्तार को कम होने से बचाने की प्रक्रिया ही वन का संरक्षण कहलाती है। वन के संरक्षण हेतु कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित है :- 

    वन संरक्षण के उपाय
    1.कृषि अयोग्य क्षेत्रों पर वृक्षारोपण करना।
    2.नदियों झीलों और जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में वृक्षारोपण करना।
    3.बृहद वना रोपण और सामाजिक वानिकी के
    कार्यक्रमों द्वारा वन आवरण क्षेत्र में वृद्धि करना
    4.वन उत्पादों का कुशल उपयोग तथा लकड़ी के
    स्थान पर पूरक पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना।
    5.जनसंख्या नियंत्रण
    6.वन में मानवीय हस्तक्षेप पर प्रतिबंध


    वन तथा वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों की चर्चा करें ।


    भारत में प्राचीन काल से ही ऐसे अनेक रीति रिवाज प्रचलित हैं, जो वन तथा वन्य प्राणियों के संरक्षण में सहायक हैं । यहां धार्मिक आधार पर कुछ वृक्षों जैसे :-  बरगद, पीपल , आंवला इत्यादि की पूजा की जाती है तथा इने काटना भी वर्जित है । 

    इसके साथ-साथ कुछ पशुओं की भी पूजा की जाती है और धार्मिक आधार पर इनका मांस खाना भी वर्जित होता है।  अतः हम कह सकते हैं कि वन और वन्य जीवों के संरक्षण में विभिन्न रीति रिवाजों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


    वन और वन्य जीवों का संरक्षण आवश्यक है। क्यों?

    वन तथा वन्य जीव एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है । इनका हमारे दैनिक जीवन और पर्यावरण में विशेष महत्व होता है । यह मानवों के लिए अत्यंत आवश्यक संसाधन है । मानवों का इससे अटूट संबंध है । यह पृथ्वी पर जीवन यापन हेतु सुरक्षा कवच है। परंतु मानवों ने वन और वन्य जीवो का बहुत ही ह्रास किया है । जिससे वे नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं । अतः वन और वन्य जीवों का संरक्षण आवश्यक है।


    चिपको आंदोलन


    चिपको आंदोलन के बारे में बताइए।


    उत्तर प्रदेश के तेहरीगढ़वाल नामक पर्वतीय जिले में 1972 में सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में अनपढ़ जनजातियों द्वारा हरे वृक्षों को कटने से बचाने के लिए एक आंदोलन प्रारंभ किया गया । इसके अंतर्गत वृक्षों को अपने आगोश में लेकर उसकी रक्षा की जाती थी। इस आंदोलन को चिपको आंदोलन कहा गया।


    जैव विविधता

    जैवविविधता क्या है ?

    किसी प्राकृतिक प्रदेश में पाए जाने वाले जंगली जानवरों , पालतू जीव जंतुओं और पाठकों की बहुलता ही जैवविविधता कहलाती है।


    जैवविविधता मानवों के लिए महत्वपूर्ण है । क्यों ?

    जैव विविधता मानवों के लिए अति महत्वपूर्ण है । यह स्वस्थ जैवमंडल और जैविक उद्योग के लिए काफी अनिवार्य है । हमारे लिए भोजन , औषधियां , रबड़,  लकड़ियां इत्यादि जैव विविधता से ही प्राप्त होते हैं । जैवविविधता से मानव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं। यह पृथ्वी के लिए सिंगार का सामान है । साथ ही साथ स्वस्थ पारितंत्र के निर्माण में जैव विविधता महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।