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उच्चावच निरूपण क्या है ? उच्चावच प्रदर्शन की विधियां हैश्यूर विधि व पर्वतीय छायाकरण विधि में अंतर

     उच्चावच निरूपण

    उच्चावच निरूपण क्या है ?

    पृथ्वी पर की विभिन्न भू आकृतियों जैसे :- शंक्वाकार पहाड़ी , पठार , "V" आकार की घाटी , आदि का मानचित्र पर निरूपण उच्चावच निरूपण कहलाता है। 

    दूसरे शब्दों में , मानचित्रण की विधि जिसमें पृथ्वी पर की त्रिविमीय आकृतियों का समतल सतह पर प्रदर्शन किया जाता है।

    Jankaari hai
    उच्चावच निरूपण क्या है ?


    उच्चावच प्रदर्शन की विधियां

    उच्चावच निरूपण की विभिन्न विधियों का उल्लेख करें।

    उच्चावच प्रदर्शन की काफी सारी विधियां हैं, उनमें से उच्चावच प्रदर्शन की प्रमुख विधियां निम्नलिखित हैं :-

    हैश्यूर विधि

    पर्वतीय छायाकरण विधि

    तल चिन्ह

    स्थानिक ऊंचाई

    त्रिकोणमितीय स्टेशन 

    स्तर रंजन 

    समोच्च रेखाएं

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    हैश्यूर विधि

    उच्चावच निरूपण की वह विधि जिसमें मानचित्र में छोटी, महीन एवं खंडित रेखाएं ढाल की दिशा अथवा जल बहने की दिशा में खींची जाती है ,  हैश्यूर विधि कहलाता है। 


    इस विधि में अधिक व तीव्र ढाल वाले भागों में रेखाओं को मोटी एवं गहरी जबकि मंद ढाल वाले भागों में रेखाओं को पतली एवं दूर-दूर बनाई जाती है । समतल सतह को खाली छोड़ दिया जाता है । इस विधि से मानचित्र काफी आकर्षक और सजीव प्रतीत होता है।


    पर्वतीय छायाकरण

    उच्चावच प्रदर्शन की विधि जिसमें भू आकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने पर ऊपर से प्रकाश परने की कल्पना की जाती है, पर्वतीय छायाकरण विधि कहलाता है।

     इस विधि में छाया के कारण अंधेरे में पड़ने वाले हिस्से को गहरी आभा से और  प्रकाश वाले हिस्से को हल्की आभा से भर दिया जाता है।


    तल चिन्ह

    उच्चावच प्रदर्शन की विधि जिसमें वास्तविक सर्वेक्षण के द्वारा भवनों, पुलों , खंभों, पत्थर और इत्यादि स्थाई वस्तुओं को मानचित्र पर विशेष चिन्ह द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, तल चिन्ह कहलाता है।

     इस विधि में मानचित्र पर ऐसे ऊंचाई को प्रदर्शित करने के लिए ऊंचाई फीट अथवा मीटर किसी एक इकाई में लिखा जाता है।


    स्थानिक ऊंचाई

    तल चिन्ह की सहायता से स्थान विशेष की मापी गई उचाई को स्थानिक ऊंचाई कहा जाता है।

    इस विधि में बिंदुओं के द्वारा मानचित्र में ऊंचाई संख्या में लिख दी जाती है। 


    त्रिकोणमितीय स्टेशन

     उच्चावच निरूपण की विधि जिसमें त्रिभुजन विधि की सहायता से समुद्र तल ऊंचाई को लिख दी जाती है, स्थानीय स्टेशन कहलाता है।

    इस विधि में मानचित्र पर त्रिभुज बनाकर धरातल की समुद्र तल से ऊंचाई लिख दी जाती है।


    स्तर रंजन 

    उच्चावच निरूपण की विधि जिसमें एक निश्चित मानक के आधार पर विभिन्न उच्चावच आकृतियों को रंगों से दर्शाया जाता है । इस विधि में समुद्र या जलीय भाग को नीले रंग से,  मैदान को हरे रंग से पर्वतों को बादामी व हल्का कत्थई रंग से दर्शाया जाता है।

    समोच्च रेखाएं

    उच्चावच निरूपण की विधि जिसमें समोच्च रेखाओं को वास्तविक सर्वेक्षण के आधार पर ऊंचाई के मान से साथ खींच दिया जाता है समोच्च रेखाएं कहलाते हैं।

    समोच्च रेखाएं एक विशेष प्रकार की काल्पनिक रेखाएं हैं । इस विधि में समोच्च रेखाओं को बादामी रंग से दर्शाया जाता है। समोच्च रेखाओं की सहायता से उच्चावच प्रदर्शन की विधि को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।


    हैश्यूर विधि व पर्वतीय छायाकरण विधि में अंतर

     हैश्यूर विधि व पर्वतीय छायाकरण विधि में अंतर स्पष्ट करें। 

    हैश्यूर विधि व पर्वतीय छायाकरण विधि में निम्नलिखित अंतर है :- 


    हैश्यूर विधि पर्वतीय छायाकरण विधि
    इस विधि में छोटी मशीन एवं खंडित रेखाएं
    ढाल की दिशा में खींची जाती हैं।
    इस विधि में भू आकृतियों पर उत्तर पश्चिम कोने
    से प्रकाश पड़ने की कल्पना की जाती है।
    यह रेखाएं ढाल की दिशा में खींची जाती है। इसमें छाया वाले भाग को गहरे रंग से दर्शाया जाता है।
    इस विधि से मानचित्र काफी आकर्षक और सजीव होता है। इस विधि से मानचित्र काफी प्रभावशाली दिखता है।