वन का वर्गीकरण
वन का वर्गीकरण

वन के वर्गीकरण के दो प्रमुख आधार हैं
1. वृक्षों के घनत्व के आधार पर
2. प्रशासकीय दृष्टि से
वृक्षों के घनत्व के आधार पर वन का वर्गीकरण
वृक्षों के घनत्व के आधार पर वन को 5 भागों में बांटा गया है :-
| 1. | अत्यंत सघन वन |
|---|---|
| 2. | सघन वन |
| 3. | खुले वन |
| 4. | झाड़ियां और अन्य वन |
| 5. | मैंग्रोव वन |
अत्यंत सघन वन
वैसे वन जिसमें वन के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 75% से अधिक भाग पर वृक्ष होते हैं , अत्यंत सघन वन कहलाता है । भारत में अत्यंत सघन वन का विस्तार 54.6 लाख हेक्टेयर भूमि पर है। जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.66% है। इस वन का विस्तार असम और सिक्किम के अलावे सभी पूर्वोत्तर राज्यों में है।
सघन वन
वैसे वन जिसमें वन के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 40% से 70% भाग पर वृक्ष होते हैं सघन वन कहलाते हैं। भारत में सघन वन का विस्तार 73.6 लाख हेक्टेयर भूमि पर है । जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 3% है। सघन वन का विस्तार हिमाचल प्रदेश , सिक्किम, मध्य प्रदेश , जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में है।
बिहार में वन संपदा की क्या स्थिति है ? जाने
खुले वन
वैसे वन जिसमें वन के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 10 से 40% भाग पर वृक्ष होते हैं, खुले वन कहलाते हैं । भारत में खुले वन का विस्तार 2.59 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर है। जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 7.12% है । इस वन का विस्तार कर्नाटक ,तमिलनाडु , केरल , आंध्र प्रदेश, उड़ीसा के कुछ जिलों और असम के 16 आदिवासी जिलों में है।
झाड़ियां और अन्य वन
वैसे वन जिसमें वन के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 10% से कम भाव पर झाइयां और वृक्ष होते हैं , झाड़ियां और अन्य वन कहलाते हैं । भारत में इसका विस्तार 2.459 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर है। जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल है का 8.68% है। इस वन का विस्तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के मैदानों में है।
मैंग्रोव वन
मैंग्रोव वन का विस्तार तटीय क्षेत्रों में होता है विश्व के तटीय वन क्षेत्र का मात्र 5% ही भारत में पाया जाता है। भारत में मैंग्रोव वन का विस्तार 4.4 लाख हेक्टेयर भूमि पर है । जो कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 0.14% है। इसका विस्तार गुजरात कर्नाटक , महाराष्ट्र , उड़ीसा , तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश , पश्चिम बंगाल, अंडमान निकोबार द्वीप समूह , पुडुचेरी, केरल और दमन द्वीप पर है।
प्रशासकीय दृष्टि से वन का वर्गीकरण
वन को प्रशासकीय दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित है
| 3. | रक्षित वन |
|---|---|
| 4. | आरक्षित वन |
| 5. | अवर्गीकृत वन |
आरक्षित वन
वैसे वन जो जलवायु की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं और सरकार द्वारा उन्हें संरक्षित किया गया है आरक्षित वन कहलाते हैं। इसमें लकड़िया काटना और पशु चारण वर्जित होता है । भारत में 54% वन क्षेत्र आरक्षित किए गए हैं । इसकी आवश्यकता बाढ़ नियंत्रण , भूमि संरक्षण, मरुस्थल प्रसार को रोकने और जलवायु नियंत्रण हेतु है।
रक्षित वन
वैसे वन जो सरकार के नियंत्रण में होते हैं लेकिन विशेष नियमों के अधीन पशुओं को चराने और सीमित रूप से लकड़ी काटने की सुविधा दी जाती है, रक्षित वन कहलाता है । भारत में 29% वन क्षेत्र रक्षित वन है।
अवर्गीकृत वन
वैसे वन जिसमें सरकार की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं होते हैं, अवर्गीकृत वन कहलाते हैं । इस प्रकार के वन में लकड़ी काटने और पशुओं को चलाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है । भारत में 17% वन क्षेत्र अवर्गीकृत वन है।
