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संसाधन क्या है । इसके प्रकार एवं महत्व।

 इस पेज में आप जानने वाले हैं संसाधन क्या है इसकी परिभाषा और इसके वर्गीकरण के प्रमुख आधार संसाधन संरक्षण संसाधन नियोजन इत्यादि।

    संसाधन की परिभाषा 

    मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले सभी जीव जंतु , पदार्थ वस्तुएं इत्यादि संसाधन कहलातें हैं।

    संसाधन क्या है । इसके प्रकार एवं महत्व।

    इनसे पूछे जाने वाले प्रश्न :- 

    • संसाधन को परिभाषित करें ।
    • संसाधन क्या है? 
    • संसाधन के बारे में आप क्या जानते हैं।
    • संसाधन की परिभाषा लिखें।

    संसाधन का वर्गीकरण

    संसाधन के वर्गीकरण के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं

    1. उत्पत्ति के आधार पर
    2. उपयोगिता के आधार पर
    3. स्वामित्व के आधार पर
    4. विकास के आधार पर
    इनसे पूछे जाने वाले प्रश्न :- 
    संसाधन के वर्गीकरण के कितने आधार हैं?
    संसाधन को कितने वर्गों में बांटा गया है?

    उत्पत्ति के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण

    उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है :- 

    • जैव संसाधन 
    • अजैव संसाधन

    जैव संसाधन की परिभाषा 

    ऐसा संसाधन जिसकी प्राप्ति जैवमंडल से होती है और इसमें सजीव के लक्षण मौजूद होते हैं, जैव संसाधन कहलाता है। उदाहरण : मनुष्य, बनस्पति , मत्स्य , पशुधन एवं अन्य प्राणी समुदाय इत्यादि।

    अजैविक संसाधन की परिभाषा 

    निर्जीव वस्तुओं के समूह को अजैव संसाधन कहा जाता है।  उदाहरण : चट्टानें , धातु , खनिज, मिट्टी , जल, भवन , सूर्य प्रकाश इत्यादि।


    उपयोगिता के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण

    उपयोगिता के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं :- 

    • नवीकरणीय संसाधन
    • अनवीकरणीय संसाधन

    नवीकरणीय संसाधन की परिभाषा 

    वैसा संसाधन जिन्हें भौतिक - रासायनिक प्रक्रिया द्वारा पुनः प्राप्त किया जा सके , नवीकरणीय संसाधन कहलाता है। उदाहरण : सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा , जल विद्युत,  वन एवं वन्य प्राणी इत्यादि।

    अनवीकरणीय संसाधन की परिभाषा 

    वैसे संसाधन जिसका विकास लंबी अवधि में जटिल प्रक्रियाओं द्वारा होता है और इस प्रक्रिया को पूरा होने में लाखो वर्ष लग सकते हैं अनवीकरणीय संसाधन कहलाता है। उदाहरण :  जीवाश्म इंधन ।

     नोट : इनके कुछ संसाधन पुनः चक्रिय भी नहीं होते हैं।

    स्वामित्व के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण

    स्वामित्व के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं :- 

    • व्यक्तिगत संसाधन 
    • सामुदायिक संसाधन
    •  राष्ट्रीय संसाधन
    •  अंतरराष्ट्रीय संसाधन

    व्यक्तिगत संसाधन की परिभाषा 

    वैसे संसाधन जो व्यक्ति विशेष के अधिकार क्षेत्र में होते हैं व्यक्तिगत संसाधन कहलाता है।  उदाहरण :  भूखंड, घर व अन्य जायदाद इत्यादि।

    सामुदायिक संसाधन की परिभाषा

     ऐसा संसाधन जो किसी खास समुदाय के आधिपत्य में होता है जिसका उपयोग समूह के लिए सुलभ होता है , सामुदायिक संसाधन क्या लाता है। उदाहरण :  चारण भूमि , शमशान, मंदिर , मस्जिद , गुरुद्वारा , सार्वजनिक पार्क, पिकनिक स्थल , खेल का मैदान , गिरजाघर इत्यादि।

    राष्ट्रीय संसाधन की परिभाषा

     कानूनी तौर पर किसी देश या राष्ट्र के अंतर्गत सभी उपलब्ध संसाधन राष्ट्रीय संसाधन कहलाता हैं । उदाहरण :ताप विद्युत घर , तेल शोधक कारखाना इत्यादि।

    अंतरष्ट्रीय संसाधन की परिभाषा 

    वैसे संसाधन जिनका नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा किया जाता है और उसका उपयोग सिर्फ अनुसंधान हेतु अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सहमति से किसी राष्ट्र द्वारा किया जा सकता है, अंतरराष्ट्रीय संसाधन कहलाता है। उदाहरण : खुला महासागरीय क्षेत्र ।


    विकास के आधार पर संसाधन का वर्गीकरण

    विकास के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं :- 

    • संभावी संसाधन 
    • विकसित संसाधन 
    • भंडार संसाधन 
    • संचित कोष संसाधन

    संभावित संसाधन की परिभाषा 

    वैसे संसाधन जो किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद होते हैं और उन्हें भविष्य में उपयोग में लाए जाने की संभावना रहती है, संभावित संसाधन कहलाता है । उदाहरण : हिमालय क्षेत्र का खनिज।

    विकसित संसाधन की परिभाषा 

    वैसी संसाधन जिनका सर्वेक्षण उपरांत उपयोग हेतु मात्रा एवं गुणवत्ता का निर्धारण हो चुका है विकसित संसाधन कहलाता है । उदाहरण :  मुंबई हाई क्षेत्रत्र में उपलब्ध पेट्रोलियम।

    भंडार संसाधन की परिभाषा 

    वैसे संसाधन जो पर्यावरण में उपलब्ध होते हैं तथा मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हैं परंतु उपयोग हेतु उपयुक्त प्रौद्योगिकी के अभाव में सक्षम नहीं है , भंडार संसाधन कहलाता है । उदाहरण : जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन उपस्थित होते हैं जिसमें उर्जा उत्पादन की असीम क्षमता छिपी हुई है। 

    संचित कोष संसाधन की परिभाषा 

    ऐसा संसाधन जिन्हें उपलब्ध तकनीक के आधार पर उपयोग में लाया जा सकता है लेकिन इसका तत्काल उपयोग प्रारंभ नहीं हुआ है, संचित कोष संसाधन कहलाता है। उदाहरण :  जलविद्युत

    अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र क्या है

    किसी देश की तटरेखा से 200 किलोमीटर की दूरी तक का क्षेत्र अपवर्जक का आर्थिक क्षेत्र कहलाता है।

    • नोट : किसी राजनीतिक सीमा के अंतर्गत भूमि, खनिज पदार्थ, जल संसाधन, वन व वन्य जीव एवं समुद्री जीव राष्ट्रीय संसाधन है।
    • गुजरात के भुज में सौर ऊर्जा का आधुनिक उपकरण बड़े स्तर पर लगाया जा रहा है।

    संसाधन नियोजन क्या है

    संसाधन का विवेक पूर्ण उपयोग ही संसाधन नियोजन कहलाता है । 

    संसाधन नियोजन की आवश्यकता

    संसाधन किसी भी देश के विकास का आधार होता है । संसाधनों के विवेक पूर्ण दोहन हेतु सर्वमान्य रणनीति तैयार करना संसाधन नियोजन की प्रथम प्राथमिकता है।  अतः राष्ट्रीय प्रांतीय तथा अन्य स्थानीय स्तरों पर संसाधनों के समायोजन एवं संतुलन के लिए संसाधन नियोजन की अनिवार्य आवश्यकता है।

    संसाधन संरक्षण क्या है

    संसाधनों का नियोजित एवं विवेकपूर्ण उपयोग ही संसाधन संरक्षण कहलाता है। 

    संसाधन संरक्षण की आवश्यकता

    संसाधन किसी भी देश के विकास का आधार होता है । सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में संसाधनों की अहम भूमिका होती है।  किंतु संसाधनों का अविवेकपूर्ण या अतिशय उपयोग विविध प्रकार के सामाजिक , आर्थिक सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देते हैं । यह भविष्य के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि वर्तमान समय में इसलिए भावी पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए और उनके समस्याओं के समाधान हेतु संसाधनों का संरक्षण करना चाहिए।

    सतत विकास क्या है

    विकास की ऐसी प्रक्रिया जो भावी पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए सतत विकास कहलाता है । 

    संसाधन के विकास में सतत विकास की अवधारणा

    संसाधन के विकास में सतत विकास की अवधारणा भी आवश्यक है । संसाधन मनुष्य की जीविका का आधार है और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सतत विकास की अवधारणा आवश्यक है । संसाधन प्रकृति प्रदत उपहार है की अवधारणा के कारण मानवों ने इनका अधाधुंध दोहन किया है जिनके कारण विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है।

    संसाधन निर्माण में तकनीक की भूमिका

    संसाधन निर्माण में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । तकनीकों के द्वारा संसाधन की उत्पादकता तथा उपयोगिता दोनों बढ़ाई जा सकती है । तथा इसके माध्यम से संसाधन की अवस्था को अन्य रूपों में परिवर्तित करके इसके मूल्य को भी बढ़ाया जा सकता है । वास्तव में उच्च तकनीक के अभाव में संसाधन की प्रचुरता के बावजूद हम इसका उपयोग नहीं कर सकते।

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    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास के तत्वाधान में आयोजित प्रथम पृथ्वी सम्मेलन में विभिन्न राष्ट्राध्यक्ष द्वारा स्वीकृत 800 पृष्ठीय घोषणापत्र को एजेंडा 21 या कार्यक्रम 21 के नाम से जाना जाता है । इसमें सतत विकास पर विशेष बल दिया गया और सतत विकास पर खर्च हेतु विश्व पर्यावरण कोष की स्थापना भी की गई।