प्रदूषण का परिचय
प्रस्तावना :
प्रदूषण सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की एक प्रमुख समस्या है । मानव के द्वारा किए गए विभिन्न क्रियाकलापों ने प्रकृति में प्रदूषण उत्पन्न किया है । अर्थात प्रदूषण का मुख्य कारण मानवीय क्रियाकलाप ही है। विज्ञान के आधुनिक रूपी वर्तमान युग में मानवों को कुछ वरदान भी मिले हैं तो कुछ अभिशाप भी मिले हैं। कुछ अभिशाप ऐसे हैं जो आज भी मानव को परेशान कर रहे हैं उन्हीं में से एक है प्रदूषण।
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प्रदूषण क्या है
क्या है प्रदूषण :
आवश्यक चीजों में अवांछित पदार्थों का मिलना प्रदूषण कहलाता है। यह एक ऐसा अभिशाप है जो विज्ञान की कोख से जन्मा है और इसे संपूर्ण मानव जाति सह रही है।
प्रदूषण का अर्थ
प्रदूषण का तात्पर्य :
प्रदूषण का सामान्य अर्थ प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना है। प्रदूषण की वजह से संपूर्ण मानव जाति को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण के प्रकार
प्रदूषण तरह-तरह के :
प्रदूषण कई प्रकार के होते हैं । प्रदूषण के प्रमुख प्रकार हैं - वायु प्रदूषण, स्थल प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं ध्वनि प्रदूषण।
वायु प्रदूषण
वायु में अवांछित पदार्थों का मिलना ही वायु प्रदूषण कहलाता है। 24 घंटे चल रहे कल कारखाने , मोटर वाहनों का काला धुआं इत्यादि वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक हैं । यह समस्या बड़े शहरों में सघन आबादी और वृक्षों के अभाव के कारण होती है।
स्थल प्रदूषण
स्थल पर अवांछित पदार्थों की उपस्थिति जो मृदा की उर्वरा शक्ति को प्रभावित करती है स्थल प्रदूषण कहलाता हैै। पॉलिथीन का बढ़ता उपयोग स्थल प्रदूषण के लिए जिम्मेवार है।
जल प्रदूषण
जल में अवांछित पदार्थों का मिलना ही जल प्रदूषण कहलाता है । इसका एक प्रमुख कारण कारखानों के दूषित जल का नदियों व अन्य जल स्रोतों में मिलना है। इसके कारण विभिन्न तरह की बीमारियां भी उत्पन्न होती है।
जल प्रदूषण के बारे में अधिक जानें
ध्वनि प्रदूषण
वायुमंडल वह हमारे पर्यावरण में अप्रिय ध्वनि का प्रसार ही ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। ध्वनि प्रदूषण में बहरेपन के साथ-साथ तनाव को भी जन्म दिया है।
प्रदूषण के कारण
प्रदूषण क्यों है :
प्रदूषण की उत्पत्ति मानवों के विभिन्न क्रियाकलापों से होती है प्रदूषण उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :-
- कल कारखाने का विस्तार
- वैज्ञानिक उपकरणों का बढ़ता उपयोग
- वृक्षों की अंधाधुंध कटाई इत्यादि।
प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
प्रदूषण नियंत्रण :
- वृक्षारोपण को बढ़ावा देना
- कल कारखानों का सीमित विकास
- लोगों में जागरूकता बढ़ाना
- वैज्ञानिक उपकरणों का अनावश्यक उपयोग ना करना इत्यादि।

